अगर आप भी करते है अपने डेस्क पर ही लंच तो जरुर पढ़े ये ख़बर…

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अक्सर लोग अपने कामों में जायदा व्यस्त हो जाने के कारण अपने लंच का समय भी नहीं निकाल पाते और डेस्क पर ही काम करते करते अपना लंच करने में सहूलियत समझते हैं. ऑफिस में एक लंच ब्रेक ही ऐसा होता है जिसमें काम से थोड़ी राहत मिलती है. जिस दौरान अक्सर लोग कैन्टीन या ऑफिस के बाहर जाने का सोचते है. मगर बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिन्हें काम की टेंशन में अपने डेस्क पर ही लंच करना उचित लगता है.

अक्सर लोग यही सोचते हैं कि अपने डेस्क पर लंच करने से वे जल्दी काम शुरु कर देंगे या आपके बाकी के साथी आपको हार्ड-वर्किंग समझेंगे. लेकिन वो ये नहीं जानते है कि ऐसा करने से वो क्या मिस कर रहे हैं? इसी सोच को लेकर चट्टानूगा यूनिवर्सिटी ऑफ टेनेसी के इंडस्ट्रियल-ऑर्गनाइजेशनल साइक्लॉजी के प्रोफेसर क्रिस क्योनिंघम बता रहे हैं कि ऐसा करना उतना लाभदायक नहीं होता है जितना की वो सोचते है.

क्या हो सकती है परेशानियाँ:

काम से मेंटल ब्रेक नहीं मिल पाता है- शारीरिक रूप से काम से थोड़ा बाहर निकलना बहुत जरूरी होता है क्योंकि ब्रेक के समय आप काम के बारे में नहीं सोचते और रिचार्ज महसूस करते है जिससे आप काम और फुर्ती से कर पाते है.मगर अपने डेस्क पर ही लंच करने से मेंटल ब्रेक नहीं मिल पता और वैसी फुर्ती नहीं मिल पाती.

काम की टेंशन कम नहीं होती है- डेस्क पर बैठकर लंच करने से आपका ध्यान काम और ईमेल या चैट मैसेज का रिप्लाई करने पर ही होता है. जिसके कारण काम का टेंशन कम नहीं हो पाता.

को-वर्कर्स या दोस्तों के साथ मिलना-जुलना नहीं हो पाता – ऑफिस में ब्रेक के टाइम बाकी और कुलीग के साथ बातचीत या दोस्ती करने का सही मौका होता है. मगर डेस्क पर लंच करने के कारण वो अपने को-वर्कर्स या दोस्तों के साथ नहीं मिल पाते.

इस पर कर्नल प्रोफेसर केविन क्निफिन का मानना है कि लंच ब्रेक बाकी कुलीग्स के साथ कनेक्ट होने का सही मौका है और इससे काम के प्रदर्शन पर भी अच्छा असर देखने को मिलता है.

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