चुनाव से पहले अखिलेश के लिए फिर खड़ी हुई बड़ी उलझन!

akhilesh-yadav


अपने पिता मुलायम सिंह यादव के हाथ से सपा की कमान अपने हाथों में आने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए एक और बड़ी उलझन खड़ी हो गई है. कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले ही अखिलेश को समाजवादी की सबसे उंची गद्दी मिल गई है लेकिन उन्हें फैसला लेने के बाद थोड़ी से कठनाई जरुर हो रही है. क्योंकि राजनीति के जानकर यह कह रहे हैं कि सपा अगर कांग्रेस से या रालोद से गठबंधन नहीं करेगी तो उसे इस चुनाव में पिछले बार से कम सीटें आ सकती हैं. ऐसे में इन दोनों पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ना अखिलेश की मजबूरी हो सकती है.

पर दिक्कत यहां आ रही है कि कांग्रेस अपनी सीटों से समझौता नहीं कर पा रही और न ही रालोद कोम्प्रोमाईज़ करने को तैयार है. जबकि यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस चाहती है कि गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा अखिलेश हो तो चुनाव जितने के बाद उनकी पार्टी से एक डिप्टी सीएम को भी चुना जाए. कुछ नेताओं का कहना है कि अपनी मांग से कम सिट मिलने के बाबजूद भी कांग्रेस को अगर यूपी में डिप्टी सीएम मिल जाता है तो यह पार्टी सपा के साथ गठजोड़ पर राजी हो जाएगी.

अगर ऐसा हुआ रालोद से भी किसी जीते हुए विधायक को कैबिनेट मंत्री बना दिया जा सकता है. हालांकि सत्ता में आने के लिए कांग्रेस और रालोद को भी सपा का ही सहारा है. इस स्थिति में यदि कांग्रेस और रालोद आनाकानी करती है तो सपा के साथ साझेदारी का यह मौका भी दोनों पार्टीयों के हाथ से जा सकता हैं. क्योंकि सपा भी 2012 चुनावों के नतीजे के हिसाब से ही कांग्रेस और रालोद को सीट देना चाहती है. जिसमें कांग्रेस को 28 सीटें मिली थी. जबकि रालोद को इससे कम!

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